ईरान और तुर्की के राष्ट्रपति 19 दिसम्बर से कुआलालम्पुर में शुरू होने वाले इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए मलेशिया पहुंच चुके हैं।
यहां दिलचस्प बात यह है कि इमरान ख़ान ने इस साल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सम्मेलन के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान और मलेशिया के प्रधान मंत्री महातिर मोहम्मद के साथ मुलाक़ात में इस सम्मेलन का विचार पेश किया था और तीनों नेताओं में इसके आयोजन पर सहमति बनी थी।
लेकिन पाकिस्तान के गॉड फ़ादर सऊदी अरब को मुस्लिम देशों की एकजुटता का यह विचार पसंद नहीं आया और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इमरान ख़ान को रियाज़ बुलाकर उनके कान मरोड़ दिए।
जिसके बाद से यह आशा की जार रही थी कि पाकिस्तान अब इस सम्मेलन में भाग नहीं लेगा।
मंगलवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहाः सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने मुस्लिम देशों के इस सम्मेलन में पाकिस्तान के भाग लेने पर चिंता ज़ाहिर की थी कि इससे मुस्लिम देशों के बीच विभाजन बढ़ेगा।
कुआलालम्पुर में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दर्जनों विश्व नेता, बुद्धिजीवी और विद्वान भाग लेकर उन मुद्दों पर विचार करेंगे, जिनका मुस्लिम जगत को सामना है।
सऊदी अरब को यह डर है कि इस सम्मेलन में मुस्लिम देश मिलकर कहीं किसी नए संगठन का गठन न कर लें, जिससे उसके वर्चस्व वाले ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन महत्व ही ख़त्म हो जाए।
अकसर मुस्लिम देश ओआईसी की निष्क्रियता को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं और उसका विकल्प खोजने की उनकी पुरानी मांग रही है। इसलिए कि अमरीका के दबाव के कारण, सऊदी अरब इस्लामी जगत से जुड़े मुद्दों और समस्याओं को कभी ओआईसी में उठने नहीं देता है।
हालांकि मलेशिया ने इस बात से इनकार किया है कि ओआईसी को टक्कर देने के लिए कुआलालम्पुर शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
मंगलवार को मलेशिया के प्रधान मंत्री महातिर मोहम्मद ने एक बयान जारी करके कहा है कि कुआलालम्पुर सम्मेलन एक ग़ैर सरकारी संगठन की पहल पर आयोजित हो रहा है, जिसे मलेशियाई सरकार का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि कुछ आलोचकों का यह मानना ग़लत है कि यह एक नया ब्लॉक बनाने के लिए है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मेलन धर्म या धार्मिक मामलों पर बहस के लिए नहीं है, बल्कि मुस्लिम उम्माह को पेश समस्याओं पर विचार विमर्श के लिए है।
प्रधान मंत्री मोहम्मद का कहना था कि मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए उन्होंने स्पष्टीकरण सऊदी किंग सलमान को भी दिया है।
पाकिस्तानी प्रधान मंत्री ने सऊदी अरब के दबाव में कुआलालम्पुर सम्मेलन में भाग नहीं लेने का फ़ैसला ऐसी स्थिति में किया है कि जब मलेशिया और तुर्की ने कश्मीर मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था और भारत की नाराज़गी मोल ली थी और यह भारत के लिए यह किसी झटके से कम नहीं था।